Saturday, 4 June 2016

Dur nagari badi dur nagari, kaise aau me kanha teri gokul nagari badi dur nagari


दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२) कैसे आऊं मैं कन्हाई (२) तोरी गोकुल नगरी बड़ी दूर नगरी 
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)
रात को आऊं कान्हा डर मोहे लागे (२) दिन को आऊं तो देखे सारी नगरी, दूर नगरी बड़ी दूर नगरी
[ ये अज्ञान की रात्रि है, साधक संकेत कर रहा है की हे प्रभु, कभी अविद्या है, कभी राग है, कभी द्वेष है, कैसे आगे बड़े प्रभु, आप ही कोई बल हमें दें ]
सखी संग आऊं कान्हा शर्म मोहे लागे (२) अकेली आऊं तो भूल जाऊं डगरी (२) दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)
[ क्यूंकि साधना के पथ पर साधक को अकेले ही चलना होता है, वहां दो का संग है ही नहीं ]
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)
धीरे धीरे चलूँ तो कमर मोरी लचके (२) झटपट चलूँ तो छलकाए गगरी (२) दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)
मीरा के प्रभु गिरधर नागर (२) तुमरे दरश बिन मैं तो हो गई बाबरी (२) दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)
आओ मनमोहना आओ नन्दनन्दना गोपियों के प्राणधन राधा जी के रमणा (२) 
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी (२)



Mujhe de do bhajan wali wo mala by shri mridul krishna ji


[तो भगवान से यही मांगिये, आपने हमें तो जो ये वीणा दी है, तार भी इस वीणा में लगा दिया है तो मुझे दे दो भजन वाली वो माला, हे ठाकुर, हे गोपाल, हे बांके बिहारी, हे किशोरी, आपके श्री चरणों में यही भाव है ]
मुझे दे दो भजन वाली वो माला (3) वो माला वो माला (२) मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
जो माला द्रोपदी जी ने फेरी (3) देखो चीर बड़ा गए नन्दलाला (२) [ वही माला का प्रभाव था ]   
मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
श्री राधे श्री राधे ....
जो माला माता शबरी ने फेरी (३) [ गुरु मतंग ऋषि कह कर गए थे बेटी तेरी कुटिया में राम आएंगे, जप रही थी राम राम ] जो माला माता शवरी ने फेरी (३) 
झूटे बेरो को खा गए राम लाला (३) मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
जो माला हनुमान जी ने फेरी (३) देखो लंका को पल में जला डाला (२) 
मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२) वो माला वो माला (२) मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
जो माला प्रह्लाद जी ने फेरी (३) नरसिंह बन के आ गए प्रतिपाला (२)
मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
जो माला बाई मीरा ने फेरी (३) देखो ह्रदय में बस गए नंदलाला (२)
मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२) वो माला वो माला (२) मुझे दे दो भजन वाली वो माला (२)
जय गोविंदा गोपाला मुरली मनोहर नंदलाला (२)
जय राधे राधे जय राधे राधे 

[ So ask to the God, we have lute, have wires in lute so give us rosary of hymn]

Please give us that rosary of hymn that was used by Dropadi so that you increased her clothes.
Please give us that rosary of hymn that was used by mother Shabari so that Shri Ram eaten false berry
Please give us that rosary of hymn that was used by Hanuman ji so that he burnt the Lanka
Please give us that rosary of hymn that was used by Prahlad ji so that you came in as Narsimha
Please give us that rosary of hymn that was used by Meera bai so that you live in her heart 




meaning of ३६३ or 363 in almighty363


almighty३६३  or almighty363

३६३ के दो पार्ट हैं :

३६ मतलब इंसान और भगवन का रिस्ता बिलकुल एक दूसरे से जुड़े हुए जैसे ३ और ६ जुड़े हुए हैं जब हम ३६ लिखते हैं तो इंसान को भगवन से हमेश जुड़े रहना चाहिए |

६३ मतलब इंसान और दुनिया ( मोह, लालच, बेईमानी, दूसरों की बुराई, घमंड, स्वार्थ, दूसरों का बुरा चाहना, गुस्सा, दूसरों से उम्मीद रखना और सभी गलत बातें ) का रिस्ता, जैसे ६ और ३ में हमेशा दूरी रहती है ६३ लिखने में |

363 has two parts:
36, it is the relation of man and the god because when we write 36, 3 and 6 will always be closer so that should be the relation of man with the god.

63, should be the relation of man with the world ( all the bad things in the world ). When we write 63, 6 and 3 will always be far so the man should keep away from the bad things.

Friday, 3 June 2016

aao aao mere nandlal aa jao by shri mridul krishna ji

vidur ji katha in shri bhagwat by shri mridul ji

Mera dil deewana ho gya vrindavan ki galiyon mein


मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में (२) वृंदावन की गलियों में बरसाने की गलियों में (२) 
जो होना था सो हो गया वृंदावन की गलियों में (२) 
मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में
सावन की मस्त बहारें यहाँ रिमझिम पड़े फुहारें (२) मन वंशी की धुन में खो गया वृंदावन की गलियों में (२)
मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में, वृंदावन की गलियों में बरसाने की गलियों में (२) 
जो होना था सो हो गया वृंदावन की गलियों में (२)
मेरे मोहन मुरली वाले मुझे तुझ बिन कौन सम्भाले (२) मेरा चित्त चुरा के वो गया वृंदावन की गलियों में (२) 
मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में
मैं ढूँढत ढूँढत हारा मुझे मिला ना मुरली वाला (२) मैं तड़प तड़प के रो गया वृंदावन की गलियों में (२)
मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में
राधे का नाम पुकारा मेरा बांके बिहारी आया (२) राधे का ध्यान लगाया मेरा बांके बिहारी आया, राधे संग दर्शन दे गया वृंदावन की गलियों में (२)
मेरा दिल दीवाना हो गया वृंदावन की गलियों में (२) वृंदावन की गलियों में बरसाने की गलियों में (२) 
जो होना था सो हो गया वृंदावन की गलियों में (२) 
जय राधे जय राधे जय राधे जय राधे  

Thursday, 2 June 2016

Teri sharan pada hun mujhko to kya fikar hai by shri mridul krishna ji


तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है () तेरा ही गीत गाउँ दूजा नहीं जिकर है ()
तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है ()
जो दीखता जगत में, खाता है काल सबको () खाता है काल सबको
वह काल उनसे डरपे, जिसपे तेरी मेहर हो () तेरा ही गीत गाउँ दूजा नहीं जिकर है
तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है ()
मैं हूँ सदा ही तेरा, बिन मोल का हूँ चेरा () बिन मोल का हूँ चेरा
कुछ भी करो करालो () मेरा नहीं उजर है () तेरा ही गीत गाउँ दूजा नहीं जिकर है
तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है ()
[ दोनों हाथ उठाकर, ये शरणागत भाव है हाथ उठाना, प्रभु हम आपकी शरण में हैं| इसलिए जब जब मंदिर में जाएँ, बिहारी जी का दर्शन करें तो दोनों हाथ जरूर उठाइए, प्रभु मैं आपका हूँ ]
तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है ()
व्यापक सभी जगत में, तुहि झलक रहा है () तुहि झलक रहा है
तुझको कोई जाने () पर, [ इसको कोई विरला ही जनता है ] सबकी तुझे खबर है ()
तेरा ही गीत गाउँ दूजा नहीं जिकर है
तेरा ही अंश हुँ मैं हक़दार तेरे दर का () हक़दार तेरे दर का
तेरी ही गोद में हुँ () अब किसी का डर है ()
तेरा ही गीत गाउँ दूजा नहीं जिकर है
तेरी शरण पड़ा हूँ मुझको तो क्या फिकर है ()
I am in your shelter, I don’t have any worry
I sing only your song, don’t have any other reference
The time eats all whoever is in the world but the time has fear of, whoever has your mercy
I am always yours and free servant; I will do whatever you want
You are in all over the world, nobody knows you but you know everything
I am your part and entitled with your home
I am in your lap and have no worry
I sing only your song, don’t have any other reference

Sunday, 29 May 2016

Jab mile tar se tar kyo na mile kanhaiya


जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया, जब होवे सच्चा प्यार क्यों न मिले कन्हैया 
क्यों ना मिले कन्हैया क्यों ना मिले कन्हैया, जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया
चंचल मन को तू समझा ले, हरी चरणों में प्रीत लगा ले (२)
मन से तज ले अहंकार, क्यों ना मिले कन्हैया (२)
क्यों ना मिले कन्हैया क्यों ना मिले कन्हैया, जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया
वन में बैठी शबरी माई (२) राम नाम की लगन लगाई (२) दिए दर्शन अवध कुमार, क्यों ना मिले कन्हैया (२)
क्यों ना मिले कन्हैया क्यों ना मिले कन्हैया, जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया
जब होवे सच्चा प्यार क्यों न मिले कन्हैया
पिता ने जब प्रह्लाद सताया (२) उसने प्रभु का ध्यान लगाया (२) नरसिंघ लिया अवतार क्यों ना मिले कन्हैया (२)
क्यों ना मिले कन्हैया क्यों ना मिले कन्हैया, जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया
दुर्योधन ने जाल बिछाया (२) अर्जुन शरण कृष्णा की आया (२) बने सारथी कृष्णा मुरार क्यों ना मिले कन्हैया (२)
क्यों ना मिले कन्हैया [ सोचो तो सही ] क्यों ना मिले कन्हैया, जब मिले तार से तार क्यों न मिले कन्हैया
जब होवे सच्चा प्यार क्यों न मिले कन्हैया

Thursday, 26 May 2016

Aao aao mere nandlal aa jao, aa jao aa jao mere gopal aa jao by shree mridul krishna ji


आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
आ जाओ आ जाओ मेरे दिल समा जाओ, आ जाओ आ जाओ मेरे दिल समा जाओ 
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ
आ जाओ आ जाओ जरा माखन चुरा जाओ, आ जाओ आ जाओ जरा माखन चुरा जाओ (२)
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
श्री राधे.... श्री राधे [ तो उनको आना ही पड़ेगा ]
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
आ जाओ आ जाओ मेरी गौएँ चरा जाओ, आ जाओ आ जाओ मेरी गौएँ चरा जाओ (२)
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
श्री राधे....
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
[कैसे बुलाओगे गोपाल को, ये गोपियों से सीखो ]
लालन एक विनय सुनिए (२) अब मेरी गलिन में आइए ना....
आइए तो करुणा कर के, हस टेर सुनाईये गाइए ना...(४)
गाइए तो अधरों धर के, मुरली ये मंद बजाइए ना...
सरसाईए ना उर प्रेम वृथा, पुनि आइए तो फिर जाइए ना.... (४)
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
आ जाओ आ जाओ रास रचा जाओ, आ जाओ आ जाओ रास रचा जाओ (२)
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
आ जाओ आ जाओ जरा गीता सुना जाओ, आ जाओ आ जाओ जरा गीता सुना जाओ (२)
आओ आओ... मेरे नन्दलाल आ जाओ, आओ आओ.... मेरे गोपाल आ जाओ (२)
आओ आओ नन्दलाल, आओ आओ गोपाल (४)


Come come my nandlal come, come come my gopal come
Come and live in my heart
Come come my nandlal come, come come my gopal come
Come and steal my butter
Come come my nandlal come, come come my gopal come
Shree radhey [ he has to come ]
Come come my nandlal come, come come my gopal come
Come come and graze our cows
How to call shree Krishna, learn from gopis
Listen one request, please come in our street
Please come once and sing song, play flute, and don’t go
Come come and sing the Geeta









Sunday, 22 May 2016

Shyam se milne ka satsang ek thikana hai


श्याम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना है, राम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना है (२)
कृष्ण से प्रीत लगी, उनको भी निभाना है (२) श्याम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना है (२)
[ ये एड्रेस है, भगवन से मिलने का यदि कोई पता है तो सत्संग है, भगवान की कथा है ]
सत्संग है एक अमृत सागर (२), जितना चाहो भर लो गागर (२) [ एक बात ध्यान रखना, ये बहुत पहले मैंने लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व ये भजन लिखा था, भागवत के श्लोक पर ]
मुक्ति को पाना है [ यदि मुक्ति चाहते हो, प्रभु से मिलना चाहते हो ?] मुक्ति को पाना है सत्संग एक ठिकाना है (२)
[ सत्संग में, दो नदियां बहती हैं गंगा और यमुना, गंगा माने ज्ञान और यमुना याने भक्ति, कभी ज्ञान की चर्चा होती है तो कभी भक्ति की चर्चा होती है ]
ज्ञान भक्ति की बहती गंगा (२), कर्मयोग की मिलती दीक्षा (२) जीवन को बनाना है, यदि, जीवन को बनाना है, सत्संग एक ठिकाना है (२)
श्री राधे..... श्याम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना....
[ हमारे मन में जो ये विकार हैं, काम है, क्रोध है लोभ है, मोह है, यदि इनको हम कम करना चाहें तो  एक ही रास्ता है ]
काम क्रोध मद लोभ छुडावे (२) [ क्यूंकि कथा ही, सत्संग ही हमें बताती है की यदि सत्य है तो सिर्फ बांके बिहारी हैं, संसार तो झुटा है, ये तो सपने जैसा है, कभी हम सपना खुली आंखों से देखते हैं और कभी आंखें बंद करके, तो आंखे खोल के सपना देखो या बंद करके, सपना तो सपना ही है और ये संसार भी एक सपने जैसा है ]
काम क्रोध मद लोभ छुडावे, काम क्रोध मद मोह छुडावे (२) विषयों की आंधी से बचावे (२) यदि कुछ पाना है (२) सत्संग एक ठिकाना है (२)
श्याम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना है (२) कृष्ण से प्रीत लगी, उनको भी निभाना है (२)
श्याम से मिलने का सत्संग एक ठिकाना है (२) कृष्ण से प्रीत लगी, उनको भी निभाना है (२)

Karpurgauram karunavtaram

Saturday, 21 May 2016

Happy Buddh Purnima to all


May the blessings of shri Buddh fill our life.

O re kanhaiya padu tere paiyan by shri mridul Krishna ji

Aao meri sakhiyo Mujhe mehndi laga do by shri mridul Krishna ji

Krishna! you praise the renunciation of doings but then you praise doings.


अर्जुन बोले : हे कृष्ण ! आप कर्मो के सन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं | इसलिए इन दोनों साधनों में से जो एक मेरे लिए भलीभांति निश्चित कल्याणकारक साधन हो, उसको कहिये |

Arjun said: dear Krishna! you praise the renunciation of doings but then you praise doings. Please tell me the best medium that is absolutely well being for me.

श्री भगवान बोले : कर्मसन्यास और कर्मयोग - ये दोनों ही परम कल्याण के करने वाले हैं, परन्तु उन दोनों में से भी कर्मसन्यास से कर्मयोग साधन में सुगम होने से श्रेष्ठ है|

Shri Bhagwan said: Renunciation of doings and doings – these both are well being but the way of ‘doings’ is greater than the renunciation of doings because of there easiness.

हे अर्जुन ! जो पुरुष न किसीसे द्वेष करता है और न किसीकी आकांक्षा करता है, वह कर्मयोगी सदा सन्यासी ही समझने योग्य है, क्योंकि राग द्वेषादि द्वन्दों से रहित पुरुष सुखपूर्वक संसारबन्धन से मुक्त हो जाता है |

Dear Arjun! The person who does not hate anybody and does not have aspirations, that ‘doing’ person is always like a saint because he easily gets out of the life bond.  


उपर्युक्त सन्यास और कर्मयोग को मूर्ख लोग प्रथक प्रथक फल देनेवाले कहते हैं न कि पंडितजन, क्योंकि दोनों में से एक में भी सम्यक प्रकार से स्थित पुरुष दोनों के फलस्वरूप परमात्मा को प्राप्त होता है |

Fool person says different results of above renunciation and ‘doings’ not the intelligent persons because nicely adopting any of the above will gets you the God.

ज्ञानयोगियों द्वारा जो परम धाम प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियों द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है इसलिए जो पुरुष ज्ञानयोग और कर्मयोग को फलरूप में एक देखता है, वही यथार्थ देखता है |

The absolute home of the God that knowledge devotee gets the same gets the ‘doings’ devotee, so the person who understand the same results of renunciation and ‘doings’, he is correct.

Sunday, 15 May 2016

Naiya le chal parli paar

नैया ले चल परली पार नैया ले चल परली पार 
जहाँ विराजें राधारानी जहाँ विराजें राधारानी अलबेली सरकार, नैया ले चल परली पार (२)
गुण अवगुण सब तेरे अर्पण, पाप पुण्य सब तेरे अर्पण, बुद्धि सहित मन तेरे अर्पण, ये जीवन भी तेरे अर्पण 
मैं तेरे चरणों की दासी (२) मेरे प्राण आधार, नैया ले चल परली पार 
जहाँ विराजें राधारानी जहाँ विराजें राधारानी अलबेली सरकार, नैया ले चल परली पार (२)
तेरी आस लगा बैठी हूँ (२) लज्जा शील गवा बैठी हूँ, अखियाँ खूब थका बैठी हूँ, अपना आप लुटा बैठी हूँ 
सावरिया मैं तेरी रागिनी (२) तू मेरा मल्हार, नैया ले चल परली पार
जहाँ विराजें राधारानी जहाँ विराजें राधारानी अलबेली सरकार, नैया ले चल परली पार (२)
तेरे बिना कुछ चाह नहीं है (२) कोई सूझती राह नहीं है, जग की तो परवाह नहीं है 
मेरे प्रीतम मेरे मांझी (२) कर दो नैया पार, नैया ले चल परली पार 
जहाँ विराजें राधारानी जहाँ विराजें राधारानी अलबेली सरकार, नैया ले चल परली पार (२)
आनंद यहाँ घन बरस रहा है (२) पत्ता पत्ता हरस रहा है, पी पी कह कोई तरस रहा है, हरी विचारा तरस रहा है (२)
बहुत हुई अब हार गई मैं (२) क्यों छोड़ा मजधार नैया ले चल परली पार (२)
जहाँ विराजें राधारानी जहाँ विराजें राधारानी अलबेली सरकार, नैया ले चल परली पार (२)
कन्हैया ले चल परली पार, कन्हैया ले चल परली पार, कन्हैया ले चल परली पार 

Saturday, 14 May 2016

shakti de ma shakti de shakti de ma by Udit adi

Bhajan lyrics: शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ shakti de ma shakti de ma shakti de ma


शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
पग पग ठोकर खाउ चल न पाऊं कैसे आऊं माँ दर तेरे 
शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
हाथ पकड़ ले हाथ बड़ा दे अपने मंदिर तक पंहुचा दे (२)
सर पे दुःख की रैना नाहीं चैना प्यासे नैना माँ दर्शन के 
शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
जग में जिसका नाम है जीवन इक युद्ध है संग्राम है जीवन (२)
तेरा नाम पुकारा दुःख का मारा माँ मैं हारा इस जीवन से 
शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ 
तेरे द्वारे जो भी आया उसने जो माँगा वो पाया (२)
मैं भी तेरा सवाली शक्ति शाली शेरोवाली माँ जगदंबे
शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ
पग पग ठोकर खाउ चल न कैसे आऊं माँ दर तेरे 
शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ

Thursday, 12 May 2016

Nobody knowing this secret. Shri Seeta ji became like picture


तन सकोचु मन परम ऊछऊ | गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू ||
जाइ समीप राम छबि देखी | रहि जनु कुअँरि चित्र अवरेखि ||

There is a hesitation in the body of shri Seeta ji, but very excited in the mind. Nobody knowing this secret. Shri Seeta ji became like picture by seeing beauty of the Shri Rama from near. 

सीताजी के शरीर में संकोच है, पर मन में परम उत्साह है | उनका यह गुप्त प्रेम किसीको जान नहीं पड़ रहा है | समीप जाकर, श्री राम जी की शोभा देखकर राजकुमारी सीताजी चित्र में लिखी से रह गयीं ||

Sunday, 8 May 2016

whose attachment, fear and anger have been destroyed, that saint is called sanity.

दुखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में जो सर्वथा निस्पृह है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गये हैं, ऐसा मुनि स्थिरबुद्धि कहा जाता है|

One who does not have fright in mind, in sorrow, who is untouched when gets happiness and whose attachment, fear and anger have been destroyed, that saint is called sanity. 

Thursday, 5 May 2016

This poem will be favorite of all with the sweet fame of the Shree Ram

मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की |
गति कूर कबिता सरित की ज्यों सरित पावन पाथ की ||
प्रभु सुजस संगति भनिति भलि होइहि सुजन मन भावनी |
भव अंग भूति मसान की सुमिरत सुहावनी पावनि ||

Tulsidas Ji says: Welfare and takes away the sins of Kalyuga, is the story of the Ram. My poem like river's direction is tilt like the pure Gangaji. This poem will be favorite of all with the sweet fame of the Shree Ram. Impure ashes of crematorium becomes very pure when touches with the body of shri Shiv ji. 

तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीरघुनाथजी की कथा कल्याण करने वाली और कलयुग के पापों को हरनेवाली है | मेरी इस भद्दी कविता रूपी नदी की चाल पवित्र जलवाली नदी (गंगाजी) की चाल की तरह टेढ़ी है | प्रभु श्री रघुनाथ जी के सुन्दर यश के संग से यह कविता सुन्दर तथा सज्जनों के मनको अच्छी लगने वाली हो  जाएगी | श्मशान की अपवित्र राख भी श्रीमहादेवजी के अंग के संगसे सुहावनी लगती है और स्मरण करते ही पवित्र करनेवाली होती है |

Monday, 2 May 2016

The person who submits all his work to the God

जो इंसान सब कामों को भगवन में सौंपकर करके और लगाव को छोड़कर काम करता है, वह जल से कमल के पत्ते की तरह पाप से दूर रहता है |

The person who submits all his work to the God and does his work without attachment, he keeps away from sins like as lotus from the water. 

Monday, 25 April 2016

Types of Body, Speech, and Mind related tenacity

Types of Body, Speech, and Mind related tenacity

देवता, ब्राह्मण, गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा - यह शरीर - सम्बन्धी तप कहा जाता है |
Worship of the God, Brahmin and the teachers, purity, simplicity, celibacy, and non-violence are the body related tenacity. 

जो उद्वेग न करनेवाला, प्रिय और हितकारक व यथार्थ भाषण है तथा जो वेद - शास्त्रों के पठन का और परमेश्वर के नाम - जप का अभ्यास है - वही वाणी - सम्बन्धी तप कहा जाता है |
The speech that is non frightening, sweet and well-being and true, reading of the Veda and ethology, practice of chanting the name of the God are speech related tenacity. 

मन की प्रसन्नता, शांतभाव, भगवतचिन्तन करने का स्वाभाव, मन का निग्रह और अंतःकरण के भावों की भलीभांति पवित्रता - इस प्रकार यह मन सम्बन्धी तप कहा जाता है |
Happiness of mind, placidly, nature of thinking about the God, detention of mind, and purity of the feeling of conscience, these are the mind related tenacity. 

Thursday, 21 April 2016

Chivalry and patience are the wheels of that chariot. Truth and virtue are the strong flag and streamer

नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना | केहि बिधि जितब बीर बलवाना ||
सुनहु सखा कह कृपानिधाना | जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना ||
सौरज धीरज तेहि रथ चाका | सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका ||
बल बिबेक दम परहित घोरे | छमा कृपा समता रजु जोरे ||
ईस भजनु सारथी सुजाना | बिरति चर्म संतोष कृपाना ||
दान परसु बुधि सक्ति प्रचण्डा | बर बिज्ञान कठिन कोदंडा ||
अमल अचल मन त्रोन समाना | सम जम नियम सिलीमुख नाना ||
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा | एही सम बिजय उपाय न दूजा ||
सखा धर्ममय अस रथ जाकें | जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें ||

महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर |
जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर ||

When Rama went to fight with Ravan, Ravan came up with full preparation. Vibhishan asked to Rama that Ravan has all the necessary things to fight with but you don’t have chariot, armor, and shoe. How will you win the Ravan? Ram said: listen Vibhishan! That chariot is different that gives the win. Chivalry and patience are the wheels of that chariot. Truth and virtue are the strong flag and streamer. Power, discretion, self control the charity are the four horses that are joined with the forgiveness, mercy and evenness.
Prayer of god is the clever charioteer. Quietness is shield, satisfaction is sword. Donation is ax, wisdom is stormy power, and the science is strong bow. Soft and immovable mind is like quiver. Control of mind, nonviolence and regulations are the lot of arrows. Worship of the Brahmin and the teacher is the impermeable armor. There is no different way of win that has the chariot like this. He can win birth and death like enemy also.

जब श्री राम रावण से लड़ने पहुंचे तो रावण पूरी तैयारी के साथ रथ पर बैठ के आया | विभीषण ने राम जी से पूछा की कैसे रावण से जीतोगे ? आपके पास न तो रथ है, न कवच है और न जूते ही हैं | राम जी ने कहा: सुनो विभीषण ! जिससे जीत होती है वह रथ दूसरा ही है | शौर्य और धैर्य उस रथ के पहिये हैं | सच और सदाचार उसकी मजबूत ध्वजा और पताका हैं | बल, विवेक, दम ( अपने आप का वश में होना ) और परोपकार - ये चार उसके घोड़े हैं, जो छमा, दया और समता रूपी रस्सी से रथ में जोड़े हुए हैं | 
ईश्वर का भजन ही चतुर सारथि है | वैराग्य ढाल है और संतोष तलवार है | दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, विज्ञान मजबूत धनुष है | निर्मल और अचल मन तरकस के समान है | मन का वश में होना, अहिंसा और नियम - ये बहुत से बाण हैं | ब्राह्मण और गुरु का पूजन अभेद्य कवच है | इसके समान विजयका दूसरा उपाय नहीं है | ऐसा धर्ममय रथ जिसके हो उसके लिये जीतने को कहीं शत्रु ही नहीं है |
जिसके पास ऐसा रथ हो, वह वीर संसार ( जन्म - मृत्यु ) रूपी महान दुर्जय शत्रु को भी जीत सकता है |

Sunday, 17 April 2016

बंदउँ बालरूप सोइ रामू

बंदउँ बालरूप सोइ रामू | सब सिद्धि सुलभ जपत जिसु नामू |
मंगल भवन अमंगल हारी | द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी ||

I pray to ( as a child ) the lord Rama. We get all the happiness naturally by chanting his name. The home of happiness, takes away the evil, show your blessing the Rama who plays in the courtyard of the Dashrath ji.

शंकर जी पारवती जी से कहते हैं, मैं उन्हीं श्री रामचन्द्रजी के बालरूप की वंदना करता हूँ, जिनका नाम जपने से सब सिद्धियां सहज ही प्राप्त हो जाती हैं | मंगल के धाम, अमंगल के हरने वाले और श्री दशरथ जी के आँगन में खेलनेवाले वे ( बालरूप ) श्री रामचन्द्रजी मुझपर कृपा करें |


Tuesday, 12 April 2016

Have dedicated their life to Krishna

Have dedicated their life to krishna

मच्चित्ता मदगत्प्राणा बोधयन्तः परस्परं | कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ||

श्री कृष्ण : अर्जुन, निरन्तर मुझमे मन लगानेवाले और मुझमे ही प्राणों को अर्पण करनेवाले भक्तजन मेरी भक्ति की चर्चा के द्वारा आपस में मेरे प्रभाव को जनाते हुए तथा गुण और प्रभावसहित मेरा कथन करते हुए ही निरन्तर संतुष्ट होते हैं और मुझ वासुदेव में ही निरन्तर रमण करते हैं |

Shree Krishna to Arjun: Devotees who always think about me, have dedicated their life to me, by talking about my worship and my power, remains satisfied with the life and they always live in my heart.

Tuesday, 5 April 2016

परम पुनीत भरत आचरनू | मधुर मंजू मुद मंगल करनू||

परम पुनीत भरत आचरनू | मधुर मंजू मुद मंगल करनू ||
हरन कठिन कलि कलुष कलेसू | महामोह निसि दलन दिनेसू ||

भरत जी का परम पवित्र आचरण ( चरित्र ) मधुर, सुन्दर और आनंद मंगलों का करनेवाला है |
कलियुग के कठिन पापों और क्लेशोंको हरनेवाला है | महामोहरुपि रात्रिको नष्ट करने के लिये सूर्य के समान है |

Bharat Ji's ultimate, holy conduct gives sonorous, beautiful pleasure. It effaces tough sins and troubles of Kalyuga. It is like the Sun for phantasm night.

Sunday, 3 April 2016

हे कुन्तीपुत्र अर्जुन ! यह मनुष्य अंतकाल में जिस - जिस भी भाव का स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस - उसको ही प्राप्त होता है, क्योकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है |

यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम | तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः ||

हे कुन्तीपुत्र अर्जुन ! यह मनुष्य अंतकाल में जिस - जिस भी भाव का स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस - उसको ही प्राप्त होता है, क्योकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है |

Shree Krishna: O Arjuna! The man in the agonal - remember the feeling of the body gives up, that - it receives only, because he is always filled with the same sense.

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च | मय्यर्पित्मनोबुद्धिर्मामेवैश्यस्यसन्शयम ||

इसलिए हे अर्जुन ! तू सब समय में निरन्तर मेरा स्मरण कर और युध्द भी कर | इस प्रकार मुझमे अर्पण किये हुए मन बुद्धि से युक्त होकर तू निसंदेह मुझको ही प्राप्त होगा |

Therefore, O Arjuna! Remember me at all times and constantly doing battle. Once you will have my feeling all the time; of course you will get me.

Saturday, 2 April 2016

जामवन्त कह सुनु रघुराया | जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया |

जामवन्त कह सुनु रघुराया | जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया | ताहि सदा सुभ कुसल निरन्तर | सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर | सोई बिजयी बिनई गुन सागर | तासु सुजसु त्रेलोक उजागर | प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू | जन्म हमार सुफल भा आजु |


Jaamwant Ji to Shree Raam Ji: To whome you show mercy on, they always get right thing. God, Saint, Human all are happy with him. He always wins, always remains down to earth and becomes ocean of skills. His renown spreads everywhere. All our work completed by your mercy God and our life became successful.


जामवन्त जी कहते हैं - हे रघुनाथ जी ! सुनिये | हे नाथ ! जिसपर आप दया करते हैं, उसका हमेशा सब कुछ अच्छा ही होता है | देवता, मनुष्य और मुनि सभी उसपर प्रसन्न रहते हैं | वह हमेश जीतता है, हमेशा नम्र रहता है और वही गुणों का सागर बन जाता है | उसी का सुन्दर यश सब जगह फैलता है | भगवन आप की कृपा से सब काम हुआ और हमारा जीवन सफल हो गया |

There are no well wishing teacher, father, mother, brother, and owner like lord Rama.

उमा राम सम हित जग माहीं | गुरु पितु मातु बन्धु प्रभु नाहीं || सुर नर मुनि सब कै यह रीति | स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती ||


There are no well wishing teacher, father, mother, brother, and owner like lord Rama. All the relations in the world are for purpose only.


शंकर जी कहते हैं, हे पारवती जी ! जगत में श्री राम जी के समान हित करनेवाला गुरु, पिता, माता, बन्धु और स्वामी कोई नहीं है | देवता, मनुष्य और मुनि सबकी यह रीति है कि स्वार्थके लिये ही सब प्रीती करते हैं |

Friday, 1 April 2016

उमा कहउँ मैं अनुभव अपना | सत हरि भजनु जगत सब सपना ||



क्रोध मनोज लोभ मद माया | छूटहिं सकल राम कीं दाया ||
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला | जा पर होइ सो नट अनुकूला ||
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना | सत हरि भजनु जगत सब सपना ||

Anger, desires, greed, pride and delusion - all these are left by the mercy of Sri Rama.Nataraja God which he is happy, he does not lose in delusion.


O Uma! I’ll tell you my experience – Hari name is true, the whole world is a dream.

क्रोध, काम, लोभ, मद और माया - ये सभी श्री राम जी की दया से छूट जाते हैं | वह नटराज भगवान जिसपर प्रसन्न होता है, वह मनुष्य माया में नहीं भूलता |
हे उमा ! मैं तुम्हें अपना अनुभव कहता हूँ - हरिका भजन ही सत्य है, यह सारा जगत तो सपना है |



Saturday, 26 March 2016

सुनु खगेश हरि भगति बिहाई | जे सुख चाहहिं आन उपाई ||

सुनु खगेश हरि भगति बिहाई | जे सुख चाहहिं आन उपाई || ते सठ महासिंधु बिनु तरनी | पैरि पार चाहहिं जड़ करनी ||

Kakbhushundi Ji: hey Garud Ji, those who wants happiness without praying to god, they are innocent who wants to cross ocean without boat.

काकभुशुण्डि जी कहते हैं कि हे गरुड़ जी ! सुनिये, जो लोग श्री हरि कि भक्ति छोड़कर दूसरे उपायों से सुख चाहते हैं, वे नादान बिना ही जहाज के सागर पर जाना चाहते हैं |

Friday, 25 March 2016

उमा जे राम चरण रत बिगत काम मद क्रोध |

उमा जे राम चरण रत बिगत काम मद क्रोध |
निज प्रभुमय देखहिं जगत केहि सन करहिं बिरोध || 

Shiv Ji says: hey Parvati Ji, who they are lover of Sri Ram Ji and who they do not have desires, ego, and anger, they see world full of god, then how they can fight with anyone?